जम्मू एंड कश्मीर आर्टिकल 370 पार्ट 1 जानिए क्यों जरुरी था आर्टिकल 370 हटाना भारत सरकार का एक ऐतिहासिक और सहासिक फैसला

जम्मू एंड कश्मीर आर्टिकल 370 सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं होने के बावजूद भी सरकार ने इसे ध्वनि मत से पारित करा लिया 125 इसके पक्ष में थे जबकि 61 खिलाफ थे । इसके बाद इस बिल को लोकसभा में पेश किया गया जहाँ पर सरकार बहुमत में है लोकसभा में 370 मत जम्मू एंड कश्मीर (पुनर्गठन) विधेयक, 2019 के पक्ष में पड़े थे और 70 इसके विरुद्ध में थे । दोनों सदनों से पास होने के बाद महामहिम राष्ट्रपति ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए इस तरह से विधेयक ने कानून का रूप ने लिया है आर्टिकल 370 की वजह से जम्मू एंड कश्मीर को बहुत सारे विशेष अधिकार मिले हुए थे लेकिन वो जम्मू एंड कश्मीर की जनता को कम वहाँ के नेताओ को और पाकिस्तान को ज्यादा फायदा दे रहे थे आइये जानते है की वो कौन कौन से अधिकार थे 1 . जम्मू एंड कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता था , जम्मू एंड कश्मीर में भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों (राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज इत्यादि) का अपमान करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता था ।

2 . यदि कोई कश्मीरी महिला किसी भारतीय से शादी कर लेती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता ख़त्म हो जाती है लेकिन यदि वह किसी पाकिस्तानी से शादी कर लेती है तो उसकी कश्मीरी नागरिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है ये कैसा कानून था की अपने देश के लोगो से शादी करना सजा के बराबर था जिसमे लड़की अपनी राज्य की नागरिकता ही खो देती थी । 3 . यदि कोई पाकिस्तानी लड़का किसी कश्मीरी लड़की से शादी कर लेता है तो उसको भारतीय नागरिकता भी मिल जाती थी फायदा पाकिस्तान का । 4 . भारतीय संविधान के भाग 4 (राज्य के नीति निर्देशक तत्व) और भाग 4 A (मूल कर्तव्य) इस राज्य पर लागू नहीं होते थे. अर्थात इस प्रदेश के नागरिकों के लिए महिलाओं की अस्मिता, गायों की रक्षा और देश के झंडे इत्यादि का सम्मान करना जरूरी नहीं था । जबकि हमारे देश में महिलाओं का सम्मान करना देश के हर एक नागरिक का कर्तव्य है । 5 . जम्मू एंड कश्मीर; भारतीय संघ का एक संवैधानिक राज्य है किन्तु इसका नाम, क्षेत्रफल और सीमा को केंद्र सरकार तभी बदल सकती थी जब जम्मू एंड कश्मीर की राज्य सरकार इसकी अनुमति दे । इस आर्टिकल के अनुसार रक्षा, विदेशी मामले और संचार को छोड़कर बाकी सभी कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य से मंजूरी लेनी पड़ती थी उसकी मंजूरी के बाद ही भारत सरकार का कानून लागू हो सकता था । 6 . इसी आर्टिकल के कारण जम्मू & कश्मीर का अपना संविधान था और इसका प्रशासन इसी के अनुसार चलाया जाता था ना कि भारत के संविधान के अनुसार । 7 . देश के दूसरे राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते थे । जिसकी वजह से अभी भी यह जमीन की मूल्य उतना नहीं बढ़ा जितना बढ़ना चाहिए था । 8 . धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागू नहीं था, CAG लागू नहीं होता था भारत का कोई भी कानून लागू नहीं होता था कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू है। कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं थे ।

9 . जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता था जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है । 10 . आर्टिकल 370 के कारण ही केंद्र; राज्य पर वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360) जैसा कोई भी कानून नहीं लगा सकता था अर्थात यदि भारत में कोई वित्तीय संकट आता है और भारत सरकार वित्तीय आपातकाल की घोषणा करती है तो इसका जम्मू & कश्मीर राज्य पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा । 11 . इस राज्य की सरकारी नौकरियों में सिर्फ इस राज्य के परमानेंट नागरिक ही सिलेक्शन ले सकते हैं इसके अलावा यहाँ राज्य की स्कॉलरशिप भी यहाँ के लोकल लोगों को ही मिलती थी । ऊपर दिए गए तथ्यों से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि जम्मू एंड कश्मीर भारतीय संघ का एक राज्य तो है लेकिन इस राज्य के लोगों को कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं जो कि भारत के अन्य राज्यों से अलग हैं। जम्मू & कश्मीर में आतंक की मुख्य वजह वहां के कुछ अलगाववादी नेताओं के स्वार्थी हित हैं। ये अलगाववादी नेता पाकिस्तान के इशारों पर जम्मू & कश्मीर के गरीब लड़कों को भडकाते हैं और आतंक का रास्ता चुनने को मजबूर करते हैं हालाँकि ये नेता अपने लड़कों को विदेशों में पढ़ाते हैं। इन नेताओ के बच्चे कभी भी आपको पथ्थरबाजी करते हुए नहीं दिखाई देंगे ,अब समय आ गया है एक देश एक सविंधान एक सोच के साथ जम्मू एंड कश्मीर को भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए सत्तर सालो में कश्मीर का उतना विकाश नहीं हुआ जितना भारत के दूसरे राज्यों का , भारत सरकार 370 हटाने की निर्णय के साथ हम गर्व से साथ खड़े है