68500 सहायक अध्यापक भर्ती में ज़िला आवंटन केस में (आरक्षित श्रेणी ) को लेकर प्रयागराज हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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प्रयागराज हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक परिषदीय विद्यालयों में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत मेरिट पर सामान्य श्रेणी में चयनित हुए आरक्षित वर्ग (एमआरसी) के अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। लगभग 275 याचिकाओं के माध्यम से हज़ारो अभ्यर्थियों ने तैनाती के आदेश को चुनौती दी थी क्यों की आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को कहना था की ऊंची मेरिट होते हुए उन्हें जनरल मान कर उनके गृह जनपद से हज़ारो किलोमीटर दूर भेज दिया गया जबकि आरक्षित श्रेणी के कम मेरिट वाले अभी अपने गृह जनपद में है ।

कोर्ट ने कहा कि इस आदेश का लाभ एमआरसी (मेरिट में चुने गए आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी) अभ्यर्थियों को ही मिलेगा। इन्हें आरक्षित श्रेणी में मानते हुए उनकी वरीयता वाले जिले में तैनाती की जाए। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने यह आदेश एक हजार से अधिक अभ्यर्थियों की लगभग 275 याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है । कोर्ट ने कहा कि, जो पहले से नियुक्त हो चुके हैं और एमआरसी श्रेणी के हैं, उनके सहित याचीगण 3 माह में अर्जी दें और अर्जी देने के तीन माह के अंदर सरकार को उनकी तैनाती का आदेश जारी करना होगा । आरक्षित श्रेणी के (एमआरसी) अभ्यर्थियों को अगले शिक्षा सत्र 2020-21 में उनकी वरीयता वाले जिलों में तैनात करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान सत्र में की गई एमआरसी अभ्यर्थियों की तैनाती संविधान के अनुच्छेद 14 व 16 (1) के विपरीत है। पहली में 34660 व दूसरी में 6136 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की गई। जब एक ही चयन प्रक्रिया के तहत चयनित थे। सभी ने ज्वाइन कर लिया है लेकिन यह कानून के विपरीत किया गया। केवल एमआरसी अभ्यर्थियों की तैनाती के आदेश रद हुए। उन्हें नए सिरे से तैनाती की जानी है।

इस भर्ती में तीन लिस्ट निकली गयी जिससे ऊंची मेरिट के बहुत सारे अभ्यर्थियों को अपना पसंद का जिला नहीं मिला इसमें सबसे ज्यादा समस्या महिलाओ के साथ हुयी उनकी ऊंची मेरिट होते हुए ऐसे एरिया में तैनाती दी गयी जिससे वो आज भी चिंताग्रत रहती है और यही सोचती है की ऊंची मेरिट की सजा मिली है , इस आर्डर के साथ वो अब कम से कम अपने घर वापसी की तरफ एक कदम बढ़ा सकती है । अभी एक दूसरी समस्या है की जो की अनारक्षित वर्ग के ऊंची मेरिट के अभ्यर्थियों की है उनको फर्स्ट लिस्ट में तो जिला आवंटन कर दिया गया लेकिन जब दूसरी लिस्ट जारी की गयी तो उसमे ( 6127 ) कम मेरिट के अनारक्षित वर्ग को गृह जनपद मिल गया जबकि ऊंची मेरिट वाले अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे है । याचियो की तरफ से सीनियर अधिवक्ता ( सीमान्त सिंह , दीपक सिंह अशोक खरे और कई सीनियर अधिवक्ताओ ) ने याचिकर्ताओं की तरफ से पक्ष रखा था जिसका फैसला 29 अगस्त को सुनाया गया । उपरोक्त जानकारी न्यूज़ पेपर और अभ्यर्थियों की बातचीत पर आधारित है ।