ISRO ( चंद्रयान 2 ) संपर्क टूटा है हम हिंदुस्तानियों का हैसला नहीं

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इसरो ने चंद्रयान - 2 को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा रेंज से 02.43 अपराह्न को सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया गया था चंद्रयान 2 ने पृथ्वी और चन्द्रमा के बीच 3, 84, 000 किलोमीटर मे से 3, 83, 998 किलोमीटर दूरी तय की थी 7 सितम्बर 2019 को 1.55 A.M पर भारत के मून लैंडर विक्रम (Lander Vikram) का इसरो (ISRO) से उस समय संपर्क टूट गया था, जब वह चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर की दूरी पर था इसरो प्रमुख के. सीवन (K Sivan) और उनकी टीम उस समय काफी दुःखी हो गयी थी । प्रधानमंत्री भी इसरो में उपस्थित थे उन्होंने भारतीयों वैज्ञानिको का हैसला बढ़ाया और उनके द्वारा की गयी मेहनत की सहारना की ।

7 सितम्बर को पूरा भारत जाग कर चंद्रयान 2 के सफल होने की प्रार्थना कर रहा था । अंतराष्ट्रीय मीडिया तथा कई देशो ने इसरो की तारीफ की । हम सभी भारतीयों को इसरो पर गर्व है वही सभी ने अपनी तरह से इसरो का हौसला बढ़ाया प्रधानमंत्री , राहुल गाँधी , प्रियंका गाँधी , अमिताभ बच्चन , आनंद महिंद्रा , सुश्री मायावती , अखिलेश सिंह यादव ऐसे ही बहुत सारे लोगो ने ट्वीट करके इसरो का हौसला बढ़ाया है , ये पहली बार हुआ है की देश के इस मिशन में सारे भारतीयों का दिल वैसे ही धड़क रहा है जैसे हमारे वैज्ञानिको का धड़क रहा था ये जूनून और जस्बा ही हमारे हिंदुस्तान की पहचान है , इसरो का हौसला बढ़ाने के लिए सबने अपनी तरफ से ट्वीट , कविता , मैसेज , लिखे इसी में एक कविता निशि यादव ने लिखी है इसरो के लिए । हम सबको भारतीय होने पर गर्व है और और पूरा देश इसरो के साथ खड़ा है ।

इस बीच चंद्रयान-2 को लेकर इसरो प्रमुख के. सीवन (K Sivan) ने रविवार को एक बेहद अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर का पता लगा लिया है. ऑर्बिटर ने लैंडर की थर्मल इमेज भी खींची है, लेकिन ऑर्बिटर का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया. न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए इसरो प्रमुख ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा, 'ऑर्बिटर ने विक्रम लैंडर का पता लगा लिया है. उसने लैंडर की थर्मल इमेज भी खींची है, लेकिन ऑर्बिटर का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया. हम लोग संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं. जल्द ही उससे संपर्क स्थापित हो जाएगा.' इसरो ने 95% इस मिशन को सफल बताया है आशा करते है प्रज्ञान के संपर्क होने पर ये मिशन 100 % सफल हो जायेगा इस प्रोजेक्ट को मंजूरी 18 सितम्बर 2008 तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंजूरी दी थी रूस द्वारा लैंडर देने मना करने से इस प्रोजेक्ट में देरी हुयी रूस के मना करने के बाद इसरो ने इसे खुद विकसित किया ये पूरी तरफ से स्वदेशी मिशन था जिस पर 978 करोड़ रूपये खर्च हुए जो और देशो के स्पेस प्रोग्राम की तुलना में बहुत कम है इसरो के लिए आने वाले 12 दिन काफी अहम् है हम भारतीय इसरो की सफलता के लिए प्रार्थना करते है । दुनिया में इसरो ने भारत का नाम ऊंचा किया है ।